वेदना-संवेदना के बीहड़ जंगलों को पार करती हुई बड़ी खामोशी से तूलिका सृजन पथ पर अग्रसर हो अपनी छाप छोड़ती चली जाती है जो मूक होते हुए भी बहुत कुछ कहती है । उसकी यह झंकार कभी शब्दों में ढलती है तो कभी लघुकथा का रूप लेती है । लघुकथा पलभर को ऐसा झकझोर कर रख देती है कि शुरू हो जाता है मानस मंथन।

शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

नेपाली भाषा में अनुवाद

 

मेरी लघुकथा :अधूरी रोटी 


अधूरी रोटी /सुधा भार्गव 

     मैंने उसकी नन्ही-सी हथेली पर चवन्नी धरी और निश्चिंत  हो गई। लेकिन वह तो सुबकते लगा , "मैं तो भूखा ही रह जाऊँगा।"

    दूसरे दिन मैंने उसकी हथेली पर चार रोटियाँ रख दीं।हताश-सा बोला, "इससे मेरी भूख तो मिट जाएगी पर बाप की भूख का क्या होगा!। उसे शराब की भूख लगी है।"

    शराब के नाम से मेरा क्रोध उमड़ आया। मैं तड़पकर बोली, "कोई एक तो भूखा रहेगा ही।"                                    "मैं भूख बर्दाश्त कर सकता हूँ, उसकी मार नहीं।" वह फिर सुबकने लगा। 

   यंत्रवत मेरे हाथ पर्स की तरफ बढ़ ही गए।

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