आज ही मुझे लघुकथा कलश का नया अंक मिला । इसका आवरण व साज सज्जा देख बहुत हर्ष हुआ। इसमें मेरी दो लघुकथाएं हैं। सूखी धरती ,हरी कोंपल तथा आखिरी ईंट । दोनों में ही आने वाले 25-30 वर्षों की हलचल का शोर है। लघुकथा कलश के संपादक योगराज प्रभाकर जी का बहुत -बहुत धन्यवाद कि इनका उन्होंने चयन किया।



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