तूलिकासदन

शनिवार, 10 अप्रैल 2010

लघुकथा -महाभारत

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लघुकथा महाभारत / सुधा भार्गव -जल्दी नहा ----देर हो रही ह...
1 टिप्पणी:
शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

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लघुकथा / सुधा भार्गव नकलची बन्दर - जल्दी नहा ----- देर हो रही है ---1
शुक्रवार, 26 मार्च 2010

लघुकथा घिराव

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लघुकथा घिराव / सुधा भार्गव जा वित्री की साध थी कि डाक्टर बेटे के लिए बहू भी डाक्टर हो | बधाई देने वालों ...
4 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 24 मार्च 2010

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लघुकथा घिराव / सुधा भार्गव जा वित्री की साध थी कि डाक्टर बेटे के लिए बहू भी डाक्टर हो | बधाई देने वाल...
सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

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हिन्दी साहित्य एक विशाल समुद्र है जिसकी हर लहर एक शुभ्र विधा है | जब यह लहर सहज व सार्थकता के सांचे मे...
शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

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एक प्रयास तूलिकासदन में मैंने तूलिका चलाकर उसे संतुष्ट करने का छोटा सा प्रयास किया है मगर संतोष कहाँ ! इसक...
शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

लघुकथा

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गुमसुम -- सुधा भार्गव चार वर्ष का नन्हा टोडी- ''माँ का दुलारा ,बाबा का प्यारा ,बहन का निराला राजा भैय...
1 टिप्पणी:
सोमवार, 21 सितंबर 2009

मेरी पहली लघुकथा

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शेरनी हार चुकी  थी रोजाना की तरह छमिया बड़बड़ करती ,धम धमाती घर में घुसी !पॉँच -पॉँच घरों में  बर्तन मांजते -मांजते थककर चूर ! दौड...
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बंगलौर, कर्नाटक, India
एक कहानीकार हूँ । अब चाहे वह फल-फूलों से लदी और काँटों से बिंधी कथा हो या लघुकथा,बालकथा हो या लोककथा सभी विधाओं पर लेखनी गतिशील है । इस ब्लॉग में मेरी कनाडा डायरी व आलेख हैं। प्यारी -प्यारी स्मृतियाँ व संस्मरण है।
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