तूलिकासदन

बुधवार, 26 मई 2021

लघुकथा

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   कला प्रेमी सुधा भार्गव वह  नई नवेली दुल्हन !ससुराल  के रीति रिवाजों को सब समय गौर से परखा करती । लोगों की आदतों से जल्दी ही परिचित...
8 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

टकराती रेत पर चर्चा

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सुप्रसिद्ध साहित्यिकी संस्था  कोलकाता की ओर से   वनिका पब्लिकेशन  प्रकाशित -2018  
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सोमवार, 20 अगस्त 2018

लघुकथा

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चुंबन       *सुधा भार्गव   स्कूल से आते ही राधिका ने अपना बैग कोने में पटका और कुर्सी पर धम्म से बैठती बोली-         “मा...
15 टिप्‍पणियां:
बुधवार, 14 मार्च 2018

प्रकाशित लघुकथा

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बाल सुदामाघर             *सुधा भार्गव         छह मास का नन्हा-मुन्ना बालक ! पेट के बल सरकना उसने शुरू कर दिया था। किसी भी समय करवट ...
1 टिप्पणी:
बुधवार, 17 जनवरी 2018

लघुकथा

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देश की माटी                  *सुधा भार्गव    "यार तेरी सारी ज़िंदगी विदेश में बीत गई। एक बार भारत छोड़ा तो पीछे मुड़कर यह भी न दे...
शुक्रवार, 3 मार्च 2017

अपने -अपने क्षितिज में प्रकाशित

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मेरी चार लघुकथाएँ  1- एक छुअन उसे बुखार ने जकड़ लिया था और एक बार जकड़ा तो ऐसा जकड़ा कि वह उसकी गिरफ्त से छूट ही नहीं पाया। दूसरों क...
7 टिप्‍पणियां:
रविवार, 25 दिसंबर 2016

लघुकथा -मजबूत कंधे

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साहित्य अमृत लघुकथा विशेषांक  जनवरी 2017 में  प्रकाशित मेरी  एक लघुकथा  मजबूत कंधे   ससुर के परलोक सिधारने के बाद कमली की...
1 टिप्पणी:
शनिवार, 12 मार्च 2016

लघुकथा अनवरत (फेसबुक मित्रों की लघुकथाएँ )में प्रकाशित

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कमाऊ पूत / सुधा भार्गव  गर्मी के दिन थे! बाँके को सब्जियाँ बेचने शहर की मंडी जाना था। ताप से बचने के लिए उसने सवेरे ही चल देना ठी...
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बंगलौर, कर्नाटक, India
एक कहानीकार हूँ । अब चाहे वह फल-फूलों से लदी और काँटों से बिंधी कथा हो या लघुकथा,बालकथा हो या लोककथा सभी विधाओं पर लेखनी गतिशील है । इस ब्लॉग में मेरी कनाडा डायरी व आलेख हैं। प्यारी -प्यारी स्मृतियाँ व संस्मरण है।
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