तूलिकासदन
शुक्रवार, 3 मार्च 2017
अपने -अपने क्षितिज में प्रकाशित
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मेरी चार लघुकथाएँ 1- एक छुअन उसे बुखार ने जकड़ लिया था और एक बार जकड़ा तो ऐसा जकड़ा कि वह उसकी गिरफ्त से छूट ही नहीं पाया। दूसरों क...
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रविवार, 25 दिसंबर 2016
लघुकथा -मजबूत कंधे
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साहित्य अमृत लघुकथा विशेषांक जनवरी 2017 में प्रकाशित मेरी एक लघुकथा मजबूत कंधे ससुर के परलोक सिधारने के बाद कमली की...
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शनिवार, 12 मार्च 2016
लघुकथा अनवरत (फेसबुक मित्रों की लघुकथाएँ )में प्रकाशित
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कमाऊ पूत / सुधा भार्गव गर्मी के दिन थे! बाँके को सब्जियाँ बेचने शहर की मंडी जाना था। ताप से बचने के लिए उसने सवेरे ही चल देना ठी...
गुरुवार, 24 दिसंबर 2015
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दिल्ली न्यूज ट्रैक ( www.delhinewstrack.com) पाक्षिक समाचार पत्रिका 15 दिसंबर,2015(सयुक्तांक-साहित्य विशेषांक )में मेरी चार लघुकथाएँ प्...
शनिवार, 25 अप्रैल 2015
लघुकथा
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नई पौध /सुधा भार्गव तैल चित्र वह एक ऐसा मदरसा था जिसमें हिन्दू –मुसलमान दोनों के बच्चे पढ़ने आते थे। एक बार मौलवी साहब उधर से...
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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015
लघुकथा
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मुफ्त की सेवाएँ/ सुधा भार्गव इस बार मैं लंदन गई तो पड़ोसी विलियम परिवार से अच्छी ख़ासी दोस्ती हो गई। विलियम के जुड़वां बेटे हुए थे। उसकी...
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शनिवार, 31 जनवरी 2015
लघुकथा
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दूध का कर्ज /सुधा भार्गव + रामकली को पड़ोस में ही कीर्तन में जाना था। देर हो रही थी , इसलिए बच्चों के दूध के गिलास मेज पर रख दिए औ...
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रविवार, 14 दिसंबर 2014
मेरी दो लघुकथाएँ
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1-भिखारी /सुधा भार्गव उस दिन मिसेज देसाई के घर किटी पार्टी का आयोजन था। इस पार्टी की मिसेज भल्ला भी सदस्य थीं पर वे किसी कारणवश ...
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