तूलिकासदन
सोमवार, 12 मई 2014
बड़े ज़ोर –शोर से मनाए जाने वाले मातृ दिवस पर
›
मेरी दो लघुकथाएँ /सुधा भार्गव 1-हैपी मदर्स डे बेटा तीन साल के बाद पढ़ाई करके विदेश से लौटने वाला था । उसने लौटने का दिन ‘ है...
2 टिप्पणियां:
सोमवार, 14 अप्रैल 2014
›
गणेश पुराण/ सुधा भार्गव -बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की आज मीटिंग है। उनका अगले वर्ष के लिए चुनाव होगा । तुम्हें भी मीटिंग में चलना...
2 टिप्पणियां:
रविवार, 9 मार्च 2014
दक्षिण भारत राष्ट्रमत में प्रकाशित -9.3 .2014
›
मेरी दो लघुकथाएँ / सुधा भार्गव 1-चुनौती पिता की बड़ी इच्छा थी कि बेटी खूब पढे–लिखे और विदेश जाये। बेटी ने उच्च शिक्षा त...
2 टिप्पणियां:
सोमवार, 10 फ़रवरी 2014
लघुकथा
›
संदेह के घेरे / सुधा भार्गव जावित्री की साध थी कि डाक्टर बेटे के लिए बहू भी डॉक्टर हो और वह साध पूरी हो गई। पता लगते ही बधाई ...
4 टिप्पणियां:
बुधवार, 25 सितंबर 2013
अंतर्जाल पत्रिका में प्रकाशित
›
लघुकथा डॉट कॉम पर भी मेरी लघुकथा छोटी बहू पढ़ सकते हैं । http://laghukatha.com/565-1.html छोटी बहू बेटी की विदा...
3 टिप्पणियां:
सोमवार, 2 सितंबर 2013
अविराम साहित्यिकी त्रैमासिक पत्रिका में प्रकाशित लघुकथा
›
माँ /सुधा भार्गव - बेटा , एक ही बिल्डिंग में आमने- सामने के फ्लैट में हम लोग रहते हैं मगर मिले मुद्दत...
मंगलवार, 27 अगस्त 2013
यह लघुकथा दलित समाज पर आधारित है जो उम्मीद की किरणों के सहारे जिंदा हैं। क्या ये किरणें प्रकाश पुंज बन पाएँगी ?
›
सूरज निकला तो/ सुधा भार्गव वह दलित थी , उस पर भी बेचारी औरत जात !फिर तो दुगुन दलित । आदमी घर बैठे उसकी छाती पर मूंग दलता और ...
2 टिप्पणियां:
सोमवार, 26 अगस्त 2013
प्रवासी दुनिया में 26 अगस्त 2013 को प्रकाशित http://www.pravasiduniya.com/short-story-testament-sudha-bhargava
›
वसीयतनामा /सुधा भार्गव -बेटा , तू हमेशा नाराज सा क्यों रहता है ? -तुमने मेरे तकदीर जो खराब कर दी । न प...
‹
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें