तूलिकासदन
शनिवार, 25 अप्रैल 2015
लघुकथा
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नई पौध /सुधा भार्गव तैल चित्र वह एक ऐसा मदरसा था जिसमें हिन्दू –मुसलमान दोनों के बच्चे पढ़ने आते थे। एक बार मौलवी साहब उधर से...
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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015
लघुकथा
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मुफ्त की सेवाएँ/ सुधा भार्गव इस बार मैं लंदन गई तो पड़ोसी विलियम परिवार से अच्छी ख़ासी दोस्ती हो गई। विलियम के जुड़वां बेटे हुए थे। उसकी...
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शनिवार, 31 जनवरी 2015
लघुकथा
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दूध का कर्ज /सुधा भार्गव + रामकली को पड़ोस में ही कीर्तन में जाना था। देर हो रही थी , इसलिए बच्चों के दूध के गिलास मेज पर रख दिए औ...
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रविवार, 14 दिसंबर 2014
मेरी दो लघुकथाएँ
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1-भिखारी /सुधा भार्गव उस दिन मिसेज देसाई के घर किटी पार्टी का आयोजन था। इस पार्टी की मिसेज भल्ला भी सदस्य थीं पर वे किसी कारणवश ...
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गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014
दो लघुकथाएँ
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जनगाथा में प्रकाशित http://jangatha.blogspot.in/2014/10/blog-post.html 1-माँ और माँ/ सुधा भार्गव दिवाली के आठ दिन पहले ही त्...
रविवार, 21 सितंबर 2014
लघुकथा
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कितनी द्रौपदियाँ! / सुधा भार्गव झूरी किसान के दो गबरू जवान बेटे थे । वह दोनों की शादी एक साथ कर देना चाहता था पर शादी ...
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शुक्रवार, 15 अगस्त 2014
लघुकथा
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आदर्शों की गठरी /सुधा भार्गव वे दोनों छोटे से होटल में ठहरे थे ।केदारनाथ के मंदिर में प्रभु दर्शन करने आए थे ।उस समय प...
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गुरुवार, 24 जुलाई 2014
लघुकथा
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महाभोज / सुधा भार्गव विवाहोत्सव का महाभोज । मसालों की खूशबू और स्वादिष्ट खाद्य-पदार्थों की सौंधाहट वातावरण में ऐसी घुली कि फूलों की...
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