तूलिकासदन
गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014
दो लघुकथाएँ
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जनगाथा में प्रकाशित http://jangatha.blogspot.in/2014/10/blog-post.html 1-माँ और माँ/ सुधा भार्गव दिवाली के आठ दिन पहले ही त्...
रविवार, 21 सितंबर 2014
लघुकथा
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कितनी द्रौपदियाँ! / सुधा भार्गव झूरी किसान के दो गबरू जवान बेटे थे । वह दोनों की शादी एक साथ कर देना चाहता था पर शादी ...
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शुक्रवार, 15 अगस्त 2014
लघुकथा
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आदर्शों की गठरी /सुधा भार्गव वे दोनों छोटे से होटल में ठहरे थे ।केदारनाथ के मंदिर में प्रभु दर्शन करने आए थे ।उस समय प...
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गुरुवार, 24 जुलाई 2014
लघुकथा
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महाभोज / सुधा भार्गव विवाहोत्सव का महाभोज । मसालों की खूशबू और स्वादिष्ट खाद्य-पदार्थों की सौंधाहट वातावरण में ऐसी घुली कि फूलों की...
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रविवार, 6 जुलाई 2014
लघुकथा
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आखेटक/सु धा भार्गव (सृज्यमान में प्रकाशित) एक जोड़ा समुद्र तट पर बैठा था। आकाश को निहारने , लहरों की तरह अठखेलियाँ करने ही तो व...
गुरुवार, 19 जून 2014
लघुकथा
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बेड़ियों की जकड़न /सुधा भार्गव तिरुपति मंदिर - पंद्रह सालों से बेड़ियों में जकड़ा हुआ है वह। - क्यों ? - मानसिक ...
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