तूलिकासदन

शुक्रवार, 15 अगस्त 2014

लघुकथा

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आदर्शों की गठरी  /सुधा भार्गव  वे दोनों छोटे से  होटल में ठहरे थे ।केदारनाथ के मंदिर में प्रभु     दर्शन करने आए थे ।उस समय प...
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गुरुवार, 24 जुलाई 2014

लघुकथा

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महाभोज / सुधा भार्गव विवाहोत्सव का महाभोज । मसालों की खूशबू और स्वादिष्ट खाद्य-पदार्थों की सौंधाहट वातावरण में ऐसी घुली कि फूलों की...
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रविवार, 6 जुलाई 2014

लघुकथा

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आखेटक/सु धा भार्गव  (सृज्यमान में प्रकाशित) एक जोड़ा समुद्र तट पर बैठा था। आकाश को निहारने , लहरों की तरह अठखेलियाँ करने ही तो व...
गुरुवार, 19 जून 2014

लघुकथा

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बेड़ियों की जकड़न  /सुधा भार्गव तिरुपति  मंदिर - पंद्रह   सालों   से   बेड़ियों   में   जकड़ा   हुआ   है   वह।  - क्यों ? - मानसिक  ...
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बुधवार, 11 जून 2014

लघुकथा

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अन्न देवता / सुधा भार्गव   दीनानाथ  बेटे की शादी करके फूले नहीं समा रहे थे। खुशियाँ उनसे संभाले नहीं सँभल रही थीं । दहेज में उ...
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बंगलौर, कर्नाटक, India
एक कहानीकार हूँ । अब चाहे वह फल-फूलों से लदी और काँटों से बिंधी कथा हो या लघुकथा,बालकथा हो या लोककथा सभी विधाओं पर लेखनी गतिशील है । इस ब्लॉग में मेरी कनाडा डायरी व आलेख हैं। प्यारी -प्यारी स्मृतियाँ व संस्मरण है।
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